अध्याय 3

अगली शाम सात बजे के थोड़ी ही देर बाद, सेथ असामान्य रूप से जल्दी घर लौट आया। वह तेज़ क़दमों से सीढ़ियों की ओर बढ़ा ही था कि आँख के कोने में हुई हल्की-सी हरकत ने उसे वहीं रोक दिया। सोफ़े पर लैला बिल्कुल स्थिर बैठी थी—उसका बैठने का ढंग अजीब-सा शांत, लगभग डराने वाला।

उसके पास ही एक भरा हुआ सूटकेस रखा था। सेथ धीमे-धीमे उसकी तरफ बढ़ा; उसकी नज़रें सामान पर टिककर सिकुड़ गईं। “ये सब क्या तमाशा है?” उसने अपना सूट जैकेट उतारा और लापरवाही से सोफ़े पर उछाल दिया, फिर टाई ढीली करते हुए उसके सामने वाले सोफ़े पर बैठ गया।

लैला का चेहरा उतरा हुआ और पीला था। उसने धीरे-धीरे सिर उठाकर उसकी आँखों में देखा—नज़र में अजीब-सी खालीपन, जैसे भावनाएँ कहीं थीं ही नहीं। “सेथ, मैं अब तुमसे प्यार नहीं करती।” ये शब्द उसके लिए अनपेक्षित थे; सीने में एक अजीब-सी जकड़न उठी, जैसे किसी ने रस्सी कसकर दिल को बांध दिया हो—इतना कि साँस लेना मुश्किल हो गया।

लेकिन उसके चेहरे पर नियंत्रण बना रहा। “ये भी कोई नया ड्रामा है? कोई चाल चल रही हो?”

उस दिन दोपहर तक सेथ जेनिफ़र के नॉर्थ शोर हाइट्स वाले घर पर था, जब उसके सेक्रेटरी ने फोन करके पिछली रात वाली घटना के बारे में बताया। खबर सुनते ही वह सीधे घर के लिए निकल पड़ा था।

लैला के चेहरे पर कोई भाव नहीं आया। “जो सोचो, सोच लो। मैं कुछ समझाने नहीं वाली। तुम्हें हमेशा यही लगता रहा कि मैं तुमसे प्यार करती हूँ, कि तुम जैसा भी बर्ताव करो, मैं कभी नहीं जाऊँगी। कभी वो सच था। अब नहीं। सेथ, मैं तुमसे प्यार नहीं करती।”

उसके शब्द सुनकर सेथ ने उसे जैसे सुन्न निगाहों से घूरा—भीतर ठंडी आग-सी भड़कने लगी।

“लैला, वो मज़ाक दूसरी बार सुनने का मन नहीं है। ये कल रात की वजह से है? इसी लिए ये नखरे—ये तुनकमिज़ाजी?” उसने उपेक्षा से कहा, किसी भी असली चिंता को आवाज़ के पीछे छिपाते हुए।

लैला उसके रवैये की आदी हो चुकी थी। सेथ उसे प्यार नहीं करता था, और अगर उसे चोट लगी होती तो भी उसे फ़र्क नहीं पड़ता। उल्टा, शायद उसे यही लगता कि अगर लैला हट जाए तो भगवान की मेहरबानी होगी—जेनिफ़र के लिए रास्ता साफ़ हो जाएगा।

“अब तो शाम हो चुकी है,” लैला ने शांत स्वर में कहा। “कल रात को करीब पंद्रह घंटे हो गए।” उसकी आँखों में गहरी उदासी झलक आई। “अगर मैं ब्रायन से लड़कर खुद को न बचाती, तो अब तक या तो मेरी इज़्ज़त लूट ली गई होती… या मैं खाड़ी में कूदकर खुद को डुबो चुकी होती। तुम अभी मेरे सामने बैठकर ये बात नहीं कर रहे होते—तुम एक लाश देख रहे होते।”

सेथ और चिढ़ गया; उसे उसकी बातों में जरूरत से ज़्यादा नाटकीयता और चालबाज़ी दिखी। उसने झटके से टाई पूरी तरह खींचकर उतार दी।

“लैला, तुम बिलकुल ठीक हो। गेट पर सिक्योरिटी गार्ड हैं, और तुम इतनी समझदार हो कि खुद संभाल सकती हो। तुमने मुझे बस ‘बेचारी’ बनकर बुलाया, ताकि मैं घर आ जाऊँ—और वो तुमने कर ही लिया, मेरे सेक्रेटरी से कहलवा दिया। और देखो, मैं आ भी गया।”

उसके शब्द लैला के आर-पार चाकू की तरह उतरे।

उसकी नज़र में, असली खतरे में मदद के लिए किया गया उसका instinctive फोन भी बस एक और सोची-समझी चाल था।

वह उसे किस तरह की औरत समझता था?

सेथ के एक्ज़ीक्यूटिव असिस्टेंट रयान ग्रे हर महीने की दस तारीख़ को लैला के खर्चों के लिए दो लाख डॉलर की लिमिट वाला बैंक कार्ड उसे आकर दे जाता था। उस दोपहर लैला ने पिछली रात वाली घटना रयान को बता दी—इस उम्मीद में कि वो सेथ को बताएगा। शायद सेथ को कुछ फ़िक्र हो, या वो ब्रायन से जाकर सवाल-जवाब करे।

लेकिन रयान ने बाद में फोन करके सिर्फ़ इतना पक्का किया कि उसने सेथ को बता दिया है। और लैला को पता चला कि हमले की बात सुनने के बाद भी सेथ ने पूरा दिन जेनिफ़र के साथ बिताया था।

उस बात ने उसके दिल में जो भी थोड़ा-बहुत बचा था, उसे भी आख़िरकार मार दिया।

लैला के होंठों पर एक कड़वी मुस्कान फैल गई। “ठीक है, अब मुझे समझ आ गया कि आपकी नज़र में मैं क्या हूँ। तो फिर एक-दूसरे को यूँ क्यों सताते रहें, सेथ? तलाक़ कर लेते हैं। आप जेनिफ़र से शादी कर लीजिए और फिर आराम से हैप्पी एंडिंग जी लीजिए।”

सेथ की आँखें सिकुड़ गईं; उसके चेहरे पर ठंडी, ख़तरनाक सख़्ती उतर आई। वह थोड़ा पीछे टिक गया और एक बाँह सोफे की पीठ पर फैला दी।

“लैला, तुम जानती हो मुझे ये खेल नफ़रत हैं—ख़ासकर तुम्हारे।” उसकी आवाज़ में बर्फ़ थी। “तुम्हें अंदाज़ा है कितनी औरतें मिसेज़ स्टैन्टन बनने के लिए क्या-क्या कर जाएँ? तुम चालें चलकर उस कुर्सी तक पहुँचीं, और अब अचानक बाहर निकलना है? तुम्हें लगता है मैं ये मान लूँगा?”

लैला बाहर से शांत रही, जबकि उसके सीने पर जैसे पत्थर रख दिया गया हो।

“मैंने वकील से तलाक़ के काग़ज़ात बनवा लिए हैं। मुझे बस ये घर और एक गाड़ी चाहिए। पैसे जितने आपको ठीक लगें दे दीजिए। मुझे और कुछ नहीं चाहिए।” उसने कॉफी टेबल की दराज़ से दस्तावेज़ निकाला और उसके सामने रख दिया।

सेथ ने उसे ढंग से देखा भी नहीं—सीधे बीच से फाड़ दिया, फिर छोटे-छोटे टुकड़े करके कूड़ेदान में उछाल दिए।

“मेरे पास डिजिटल कॉपीज़ हैं,” लैला ने धीमे से कहा। “मैं फिर प्रिंट कर लूँगी।”

पल भर में सेथ खड़ा हो गया। उसने उसे बेरहमी से पकड़कर अपनी तरफ़ खींच लिया। लैला की सांस अटक गई—अचानक आए उस झटके से वह सन्न रह गई। शादी के तीन सालों में उसकी क्रूरता हमेशा ठंडी और दूर की रही थी—कभी हाथ नहीं उठाया था।

आज तक।

“दर्द हो रहा है… सेथ, छोड़िए…” वह कांपती आवाज़ में रो पड़ी।

लेकिन सेथ ने उसे नहीं छोड़ा। जिस गुस्से को वह दबाए बैठा था, वह अब बाहर आ गया—तेज़, अनियंत्रित।

“कल रात भी तुम ऐसे ही कर रही थीं?” उसने ठंडेपन से कहा। “तुम कहती हो तुमने उसे रोक दिया, और अब मुझसे खुद को धकेल भी नहीं पा रही?”

लैला जड़ हो गई।

दर्द तो था ही, लेकिन उसके नीचे कोई और चीज़ उठ आई—झटका, अविश्वास, और निराशा का ऐसा बोझ जो सांस घोंट दे।

“या यही तुम चाहती थीं?” सेथ ने आगे कहा, उसकी आवाज़ शक से लिपटी हुई। “कोई बात है जो तुम मुझे नहीं बता रही?”

एक पल तक लैला बस उसे देखती रही—दिमाग़ जैसे खाली हो गया।

उसे पता था कि वह उससे प्यार नहीं करता।

लेकिन उसने कभी नहीं सोचा था कि वह उसे इतना गिरा हुआ समझेगा।

उसके हाथ धीरे-धीरे ढीले पड़ गए। संघर्ष जैसे उसके भीतर से रिसकर खत्म हो गया, और उसकी जगह एक खोखलापन फैलता चला गया—सीने के आर-पार।

“त… तुम क्या कर रहे हो?” उसने कमज़ोर-सी आवाज़ में पूछा, लगभग फुसफुसाहट भर।

सेथ ने जवाब नहीं दिया।

कमरा जैसे उसके चारों तरफ़ सिकुड़ता जा रहा था। हवा भारी, दमघोंटू होती चली गई, और डर चुपचाप भीतर सरक आया—बिना आवाज़ के, सांस रोक देने वाला।

और उसी पल लैला को एक बात बिल्कुल साफ़ समझ आ गई—

उसके सामने खड़ा आदमी अब वैसा नहीं रहा था, जिसे वह कभी पहचानती थी।

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